LIFE LIKE A DREAM...........

person who can explain color to a blind man can explain everything in life

                       मेरा कच्चा आंगन

मेरा कच्चा आंगन

सौंप दी है तुम्हें
अपने सपनों की धरती
अपने सपनों का आकाश ...

अब बोओ तुम बीज
भरो तुम रंग।
इन्द्रधनुष के ... चांदनी के ... अमावस के ...
या फिर मेरे तुम्हारे।
फिर जियो तुम
और पियो तुम।

लौटा नहीं सकते तुम मुझे
मेरे हिस्से के ज़मीं अम्बर
क्योंकि अब मैं नहीं हूँ ...
मैं तो हो गयी हूँ तुम।

आती है ना तुम्हें
महक मेरे कच्चे आंगन की
अपने दिल से ...

                                     

रिश्ते

अक्सर रिश्तों को रोते हुए देखा है,
अपनों की ही बाँहो में मरते हुए देखा है
टूटते, बिखरते, सिसकते, कसकते
रिश्तों का इतिहास,
दिल पे लिखा है बेहिसाब!
प्यार की आँच में पक कर पक्के होते जो,
वे कब कौन सी आग में झुलसते चले जाते हैं,
झुलसते चले जाते हैं और राख हो जाते हैं!
क्या वे नियति से नियत घड़ियाँ लिखा कर लाते हैं?
कौन सी कमी कहाँ रह जाती है
कि वे अस्तित्वहीन हो जाते हैं,
या एक अरसे की पूर्ण जिन्दगी जी कर,
वे अपने अन्तिम मुकाम पर पहुँच जाते हैं!
मैंने देखे हैं कुछ रिश्ते धन-दौलत पे टिके होते हैं,


कुछ चालबाजों से लुटे होते हैं-गहरा धोखा खाए होते हैं
कुछ आँसुओं से खारे और नम हुए होते हैं,
कुछ रिश्ते अभावों में पले होते हैं-
पर भावों से भरे होते है! बड़े ही खरे होते हैं !
कुछ रिश्ते, रिश्तों की कब्र पर बने होते हैं,
जो कभी पनपते नहीं, बहुत समय तक जीते नहीं
दुर्भाग्य और दुखों के तूफान से बचते नहीं!
स्वार्थ पर बनें रिश्ते बुलबुले की तरह उठते हैं
कुछ देर बने रहते हैं और गायब हो जाते हैं;
कुछ रिश्ते दूरियों में ओझल हो जाते हैं,
जाने वाले के साथ दूर चले जाते हैं !
कुछ नजदीकियों की भेंट चढ़ जाते हैं,
कुछ शक से सुन्न हो जाते हैं !
कुछ अतिविश्वास की बलि चढ़ जाते हैं!
फिर भी रिश्ते बनते हैं, बिगड़ते हैं,
जीते हैं, मरते हैं, लड़खड़ाते हैं, लंगड़ाते हैं
तेरे मेरे उसके द्वारा घसीटे जाते हैं,
कभी रस्मों की बैसाखी पे चलाए जाते हैं!



पर कुछ रिश्ते ऐसे भी हैं
जो जन्म से लेकर बचपन जवानी - बुढ़ापे से गुजरते हुए,
बड़ी गरिमा से जीते हुए महान महिमाय हो जाते हैं !
ऐसे रिश्ते सदियों में नजर आते हैं !
जब कभी सच्चा रिश्ता नजर आया है
कृष्ण की बाँसुरी ने गीत गुनगुनाया है!
आसमां में ईद का चाँद मुस्कराया है!
या सूरज रात में ही निकल आया है!
ईद का चाँद रोज नहीं दिखता,
इन्द्रधनुष भी कभी-कभी खिलता है!
इसलिए शायद - प्यारा खरा रिश्ता
सदियों में दिखता है, मुश्किल से मिलता है पर,
दिखता है, मिलता है, यही क्या कम है .. !!!

                                       

नफ़रत

देखो, तो अब भी कितनी चुस्त-दुरुस्त और पुरअसर है
हमारी सदी की नफ़रत,
किस आसानी से चूर-चूर कर देती है
बड़ी-से-बड़ी रुकावटों को!
किस फुर्ती से झपटकर
हमें दबोच लेती है!



यह दूसरे जज़्बों से कितनी अलग है --
एक साथ ही बूढ़ी भी और जवान भी।
यह खुद उन कारणों को जन्म देती है
जिनसे पैदा हुई थी।
अगर यह सोती भी है तो हमेशा के लिए नहीं,
निद्राहीन रातें भी इसे थकाती नहीं,
बल्कि और तर-ओ-ताज़ा कर जाती हैं।



यह मज़हब हो या वह जो भी इसे जगा दे।
यह देश हो या वह जो भी इसे उठा दे।
इंसाफ भी तभी तक अपनी राह चलता है
जब तक नफ़रत इसकी दिशा नहीं बदल देती।
आपने देखा है इसका चेहरा
-- कामोन्माद की विकृत मुद्राओं वाला चेहरा।



ओह! दूसरे जज़्बात इसके सामने
कितनी कमज़ोर और मिमियाते हुए नज़र आते हैं।
क्या भाई-चारे के नाम पर भी किसी ने
भीड़ जुटाई है?
क्या करुणा से भी कोई काम पूरा हुआ है?
क्या संदेह कभी किसी फ़साद की जड़ बन सका है?
यह ताक़त सिर्फ़ नफ़रत में है।
ओह! इसकी प्रतिभा!
इसकी लगन! इसकी मेहनत!



कौन भुला सकता है वे गीत
जो इसने रचे?
वे पृष्ठ जो सिर्फ़ इसकी वजह से
इतिहास में जुड़े!
वे लाशें जिनसे पटे पड़े हैं
हमारे शहर, चौराहे और मैदान!



मानना ही होगा,
यह सौंदर्य के नए-नए आविष्कार कर सकती है,
इसकी अपनी सौंदर्य दृष्टि है।
आकाश के बीच फूटते हुए बमों की लाली
किस सूर्योदय से कम है।
और फिर खंडहरों की भव्य करुणा
जिनके बीच किसी फूहड़ मज़ाक की तरह
खड़ा हुआ विजय-स्तंभ!



नफ़रत में समाहित हैं
जाने कितने विरोधाभास --
विस्फोट के धमाके के बाद मौत की ख़ामोशी,
बर्फ़ीले मैदानों पर छितराया लाल खून।

इसके बावजूद यह कभी दूर नहीं जाती
अपने मूल स्वर से
ख़ून से सने शिकार पर झुके जल्लाद से।
यह हमेशा नई चुनौतियों के लिए तैयार रहती है
भले ही कभी कुछ देर हो जाए
पर आती ज़रूर है।
लोग कहते हैं नफ़रत अंधी होती है।
अंधी! और नफ़रत!
इसके पास तो जनाब, बाज की नज़र है
निर्निमेष देखती हुई भविष्य के आर-पार
जो कोई देख सकता है
तो सिर्फ़ नफ़रत।

Mujhko yaar ka pata de de

ज़मीं ना दे आसमा दे दे , ज़िन्दगी मुझको आसरा दे दे ।

प्यार ना दे तो कोई बात नही , और कुछ मुझको प्यार सा दे दे ।

आज तक तेरी हर बात मानी है , उल्जी उल्जी सी मेरी कहानी है ।

मुझपर अजहर तेरी निशानी है , चार दिन की मेरी जवानी है ।

यार न दे तो कोई बात नही , और कोई मुझको यार सा दे दे ।

प्यार ना दे तो कोई बात नही , और कुछ मुझको प्यार सा दे दे ।

जलता दिया हु तो बुझा दे मुझे , कोई इबारत हो तो मिटा दे मुझे ।

कोई हसरत हो तो दबा दे मुझे, नींद में हु अगर जगा दे मुझे ।

हासिल ना हो तो कोई बात नही , मुजको सपना तू बहार का दे दे ।

और कुछ मुझको प्यार सा दे दे ....

खाव्ब न दे नींद भी तू ले ले , हसरत न दे फ़िक्र भी ले ले ।

चाँद न दे रात भी ले ले , नाम न दे जात भी ले ले ।

पर मुझको यार का पता दे दे , ज़िन्दगी मुझको आसरा दे दे ।

******************************************************************************************************

Sab Kahate hai

Sab kahte hain par koi batata nahi kaise bhulte hain kisi ke yaado ko 
sab karte hain par koi sikhata nahi kaise todte hain kiye hue waado ko 

kaash ye gun hume bhi koi sikhata chahe keemat me meri jaan hi le jaata 
chahe aakhiri baar hi sahi par ek gahri neend main so to leta 
yaade jaha mujhe jeene nahi deti waade maut ka jaam peene nahi deti 
see lete hum zakhm apne kisi tarah par ye to hume zakhm seene nahi deti 
ye tadapti jaagti raate pukaarti hain usoolo se bandhi saanse siskaarti hain 
kyu berahmo ki tarah jee rahe ho tum meri hi zindagi mujhe dhikkarti hain 
sab todte hain par koi kyu batata nahi kaise todte hain kisi ke sapno ko 
sab chhodte hain par koi sikhaata nahi kyu chhodte hain hum apno ko 

aye kaash ki ye gun bhi seekh jaate to hum bhi kisi ko dhokha de paate 
na rahte yu tadapte tanhaayiyo me apni bewafayi se kisi ko tadpaate 
kam se kam zindagi to jee paate ise to itna badtar na hi banaate 
kahte hain khuda sab kuchh dekhta hai jab marte to hum bhi saza paate 
aye khuda tuhi kyu ye sikhaata nahi kaise maarte hain jameer aur iraado ko 
sab kahte hain par koi batata nahi kaise bhulte hain kisi ke yaado ko

Welcome

Recent Photos

 

Recent Forum Posts

No recent posts.

Featured Products