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१)
उनसे प्यार करने की ये सजा पाई है ,
गम हज़ार सिने में देकर हमसे दुरिया बनाई है ।
हमारे ज़ख्म से भरे दिल को रहत कैसी मिलती ,
हम उनकी यादें दिल से न निकल पाई है ।
वो लौटा नही उसकी यादो से दिल्लगी कर ली ,
नादानियों ने उसकी ऐसी हालत बनाई है ।
बेकरार दिल को बस तेरे प्यार की तलब थी ,
सहते रहे हर जुल्म लब पे शिकवा न दुहाई है ...
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२)
हर घोसा गुलिस्तान था कल रात जहाँ में था ,
एक जश्न ऐ बहरा था कल रात जहाँ में था ।
नगमे थे हवाहो में जादू था फिजाओ में ,
हर साँस गजल्फां था कल रात जहाँ में था ।
दुरिया ऐ तुफ्फान में कश्ती थी जीवन की ,
जज्बात का तूफान था कल रात जहाँ में था ।
महताब था बाँहों में जलवे थे निगाओ में ,
हर पल चरगाह था कल रात जहाँ में था ।
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३)
एक लड़की दीवानी सी , 
एक लड़के को बहोत चाहती थी ,
हर पल उसकी यादो में जीती हर पल मुस्कुराती थी ।
शायद अपने साथ हो रहे धोके को वो ख़ुद से ही छुपाती थी ।
आँखों में नमी और होटों पर मुस्कान सजाती थी ,
सच्ची मुहबत की थी उसने फ़िर भी हर पल ठुकराई जाती थी ,
एक हसी देखने को उस लड़के की ख़ुद को दर्द पहुचाती थी ।
बहुत समझाया सबने पर वो सबकी बात ताल जाती थी,
जब भी कोई कहता की वो बेवफा है , तो अन्दर ही अन्दर मर जाती थी ।
साँसे जैसे उसे दे चुकी , दिल भी उसी बेदर्द को दे आई थी ,
उस लड़के की बातें ऐसी जो हर पल गम दे जाती थी ।
फ़िर भी उसकी खुशी के खातिर सब कुछ कर जाती थी,
उसकी बेवफाई को ख़ुद मुहबत का इनाम बताती थी ।
भूल गया छोड़ गया वो बेवफा उसे , पर वो तो उसके नाम की ही ज्योत दिल में जलती थी ।
शायद नाजुक दिल था उसके पास इसी लिए चाहते हुए भी उससे नफरत न कर पति थी ।
एक लड़की दीवानी सी एक लड़के को बहुत चाहती थी ...
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