LIFE LIKE A DREAM...........

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Zindagi kuch is tarah...

krishheda Posted by krishheda at 10:37 AM on January 19, 2009

ठुकराकर उसने कहा की मुस्कुराओ ,
हम मुस्कुराये आखिर सवाल उसकी खुशी का था,
हमने खोया वो जो हमारा था ही नही,
और उसने खोया वो जो सिर्फ़ उसी का था...

मगर सब झूठ है। आज हमने अपना सब कुछ खो दिया है उसे खो कर । मै ... एक हरा हुआ शक्श । जिसे जिंदगी में हर चीज़ मिली मगर सब कुछ एक दिखावा था । एक बात जरुर सिखा दी है इस प्यार ने की हम गरीब लोगो को प्यार करने का कोई अधिकार नही है । हम कभी कोई खाव्ब नही देख सकते । सब कुछ तोह था मेरे पास... एक दिल जिससे मै किसी से सच्ची मोहबत कर सकता था । एक वादा जो सच्चा होता । एक अरमान जिसे पुरा करने मै हर सम्भव कोशिश करता । बस एक बार वो कहा देती मै उसके लिए अपनी जन भी हस्ते हस्ते दे देता । मगर उसे हमारी बातो पर यकीं न था ।
वो दिल था हमारा । धड़कन थी हमारी । वही दिन वही रात ... वही पल वही चीन...
अब लोग उसे बेवफा कहते है मगर वो वफ़ा थी हमारी ।
मै ... सब कुछ टोह है मेरे पास ... जो चाहता हु सब कुछ तोह मिल जाता है । कमाने का एक जरिए जिसके जरिए मै दो वक्त का कमाकर खा सकता था । सर छिपाने के लिए एक असरा जहा मै रहता हू । एक नाम जिसकी अपनी एक पहचान थी । एक भाई जो मुझसे बहोत प्यार करता है , एक माँ जिसकी ममता मुझपर हमेशा ही रहती है । मगर शायद मेरे sapne बहोत बड़े है जो कभी pure नही हो सकते 
उसके लिए प्यार एक khel हुआ , मगर हमारे लिए टोह वो जिंदगी थी । फ़िर कैसे हमसे हमारी जिंदगी ruth गई । उसने टोह कहा था हमे apse bepanah प्यार है । हम apke बिना नही jee सकते फ़िर आज कैसे उन्होंने अपना रास्ता हमसे अलग कर लिया । उसके लिए प्यार हमारा एक khel हुआ मगर अब ये दिल कैसे किसी भी बात पर यकीं करे ।
एक ajnabi से हमे इतना प्यार kyu है ,
इंकार करने पर चाहत का ikrar kyu है ।
उसे pana नही मेरी takdir मै शायद,
फ़िर हर मोड़ पर उसी का intajar kyu है ..
इस भरी महफ़िल में एक गुमसुम सी खामोशी भी थी,
एक ऐसी खामोशी जो बदलो के बरसने के पहले सुने देती है,
मेरी आंखोमे भी ऐसी ही खामोशी है, जो शायद कहा रही हूँ,
अब के क्या सावन बरसेंगे , अब के बरस तोह बरसेंगी अंखिया ।
एक ऊँचाई से जब किसी का रुतबा गिरता है तोह उस शक्श के पास एक खामोशी होती है । पर
कौन कहता है खामोशिया खामोश होती है ,
खामोशियों को खामोशी से सुनो,
क्या पता शायद ये वो कहा जाये जिसकी आपको लप्जो में तलाश होती है । कही दिनों से लप्ज तलाश करने की नाकाम सी कोशिश करता आया हू । पर एकांत काटना बहोत मुश्किल होता है । जिंदगी कभी पालो में गुजर जाती है कभी जिंदगी भर एक पल नहीं गुजरता । मेरी जिंदगी में जितने पल मैंने गुजरे तोह याद नहीं पर कही अन छुए ऐसे पल है जो नहीं गुजरते । पल जो सुकून नहीं देते , पल जो सिर्फ आंसू देते है , jisme सिर्फ दर्द भरा होता है , हम हमेशा ही एक आसरा दुन्दते आये है पर न मिलना था न मिला हमको । मे ,मेरी हस्ती मेरा रुतबा सब कुछ तोह था मेरे पास ... आज हाथ क्यों खली है मेरे । हम हमेशा ही नियति को दोष देते आये है , अपनी किस्मत को रोते आये है , खुदा से शिकायत करते आये है पर क्या ये सही है , किसी की किस्मत इतनी ख़राब हूँ सकती है ? किसी का खुदा इतना किसी से रुत सकता है ? हा नियति जरुर हो सकती है । कभी कहने को शब्द नहीं मिलते कभी सुनाने को कोई शक्श नहीं मिलता ..

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1 Comment

Reply manali
06:22 AM on August 06, 2009
kya yaar senti kr deta hai

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